गुरु के समीप बैठकर प्राप्त किया गया दिव्य ज्ञान उपनिषद है औऱ इस ज्ञान को यदि किन्हीं अनुभवी, पुरुष से सुना जाये तो उस ज्ञान की दिव्यता का प्रवाह श्रोता में स्वयंमेव होने लगता है। वस्तुतः, हम सभी मूलतः ईश्वर के अंश हैं औऱ हमारा मूल स्वाभाव उस ईश्वर को जानने की तड़प है,...