व्यक्तित्व परिष्कार सत्र को संबोधित करते हुए ट्रस्टी डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने विद्यार्थी को पढ़ाई का गूढ तत्व बताते हुए कहा-प्रातःकाल स्वर्णिम काल है,उस समय जगने से
स्मृति,धृति,मेधा,प्रज्ञा का जागरण होता है।सुबह जगने पर अंतःस्फुरणा होती है।याददाश्त की क्षमता बढ़ती है।
धारण करने की क्षमता बढ़ती है,आपकी प्रतिभा बढ़ती है।
विवेक जगता है क्या करना चाहिए,क्या नही करना चाहिए। सुबह जगने से विवेक का जागरण होता है। सुबह उठने से प्राण ऊर्जा का प्रवाह वातावरण में ज़्यादा होता है। सुबह जगने के लाभ बहुत हैं।
अतः सुबह जगिए,सुबह पढ़ाई कीजिए।
उन्होंने कहा-पढाई जीवन का
सौंदर्य है।पढ़ाई में अभिरुचि तलाशिये ।तभी पढ़ाई में मन लगेगा।
इस अवसर पर सिलीगुड़ी से आए प्रवीर कृष्ण सिन्हा,अवकाश प्राप्त बी एन मंडल यूनिवर्सिटी ने संबोधित करते हुए कहा-यहां की व्यवस्था अच्छी है तथा अरुणजी द्वारा संचालित यह कार्यक्रम बहुत अच्छा है।ये हमें मदद किए हैं।और बहुतों को मदद किए हैं।
इस अवसर विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के अलावा शक्तिपीठ के सभी परिजन उपस्थित थे ।